मैंने कुछ कर गुज़रना सीखा है

मैंने कुछ कर गुज़रना सीखा है, मैंने आग पर चलना सीखा है,
तेरी मोहब्बत में ए बेवफा मेरी रूह ने जलना सीखा है,
है आग तेरी झूठी मुहोबत्त की , है लपट तेरे वादों की,
है तपिश तेरे कास्मो की, उसमे तेरी सूरत का घी सा बनाना देखा है,
मैंने कुछ कर गुज़रना सीखा है...
थी मुझे तेरी चाहत न की तेरे जिस्म की, मैंने इश्क़ में सवरन सीखा है
मैंने कुछ कर गुज़रना सीखा है। ...
संजोये थे कई सपने तेरे संग ज़िंदगी बिताने के,
उनमे कुछ खुशियां कुछ गम संग तेरे बिताने के,
उसे मैंने टूट के बिखरना देखा है , मैंने कुछ कर  गुज़रना सीखा है ........ 

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