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Showing posts from September, 2019

ये बे मौसम की बरसात जाने कब रुकेगी

मुहोब्बत का हश्र

याद है...

कुछ बनारसी सा

क्या बताये उन्हें

तेरा और मेरा

ये मौत-ए -इश्क़ सूफियाना कर देना.....

प्यार करना तो सीखा दिया है तूने,अब तुझे भूलाना कौन सिखाएगा

सच्चे इश्क़ को मंज़िल मुकम्मल कहाँ

बदल गयी..........

कायम है..........

है लफ्ज़ नहीं बताने को.......

क्यों आते है ?

मैंने कुछ कर गुज़रना सीखा है

हर दिल की एक आवाज़ होती है

दिल सिर्फ तेरा होना चाहता है