मुहोब्बत का हश्र

जब दरिया के रस्ते मुक़र्रर होते है तो लहरे किनारो पर क्यों आती है
ये तो उन मुहोब्बत का हश्र है, जिनकी हस्ती तो मिट जाती है बस  आँखे नम रह जाते है 

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