ये बे मौसम की बरसात जाने कब रुकेगी

ये बे मौसम की बरसात जाने कब रुकेगी,ये जो आ रही है तेरी याद जाने कब रुकेगी,
 के जो बसी है तू मेरे खाबो में, ये तेरे यादों की रात जाने कब ढलेगी,
के जो महक है तेरी मेरे साँसों में,तेरे मौजूदगी की ये बेचैनी जाने कब रुकेगी,
जो तू होती तो तेरीआँखों की ठहरी झील में कही ठहर जाता मैं,
अब जो फसा हूँ इस बहती दरिया में जाने मेरी कश्ती पार कब लगेगी,
ये बे मौसम की बरसात जाने कब रुकेगी,ये जो आ रही है तेरी याद जाने कब रुकेगी...

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