क्यों आते है ?
दफन कर दिए थे जो राज़ वो ज़हन में क्यों आते है
न चाह कर भी तेरे ख़याल दिल में क्यों आते है
वो बात जिनका ज़िक्र अब मैं खुद से भी नहीं करता वो बात मुझे याद क्यों आते है
चाह कर भी न ज़िक्र हो जिनका,महफ़िल में वही किस्से क्यों जुबां पर क्योंआते है
ज़ख्मो का दर्द तो भुला दिया था हमने तो क्यों आंसू दर्द बनकर आखो से छलक जाते है
और जो याद वादो को करू तो, शायद वादे तो तोड़ देने के लिए ही बनाये जाते है...
न चाह कर भी तेरे ख़याल दिल में क्यों आते है
वो बात जिनका ज़िक्र अब मैं खुद से भी नहीं करता वो बात मुझे याद क्यों आते है
चाह कर भी न ज़िक्र हो जिनका,महफ़िल में वही किस्से क्यों जुबां पर क्योंआते है
ज़ख्मो का दर्द तो भुला दिया था हमने तो क्यों आंसू दर्द बनकर आखो से छलक जाते है
और जो याद वादो को करू तो, शायद वादे तो तोड़ देने के लिए ही बनाये जाते है...
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