है लफ्ज़ नहीं बताने को.......

आज भी ठहरा हु वही फनाह हो जाने को,
जहा तूने कहा था तुझे कभी न भुलाने को,
है दर्द कई इस सीने में यादे कई बताने को,
जो भूल गई है तू मुझे तो याद तुझे दिलाने को,
है सैलाब इतना दर्द का,की शायद तुझे बहा देगा,
तू रो पड़ेगी ये दर्द तुझे भी रुला देगा,
कह न सकूंगा बात जो है तुझे बताने को,
वैसे भी रह ही क्या गया है हक़ मेरा तुझपर जताने को,
नज़रे भी आज मेरी तुझे देख चुपचाप है
धड़कने कुछ कह रही है तू समझ ले तो
वही एक जरिया है अपनी बात तुझे बताने को.......... 

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